What is DNS? [ DNS क्या होता है ]हिंदी

आज हम जानेंगे की DNS क्या होता है [What is DNS?] और यह कैसे काम करता है [step by step]

जैसा कि हम जानते हैं कि computer system नंबर जैसे  0 और 1 में ही communicate कर सकते है और हर computer या server का IP Address  होता है जैसे  की 168.16.254.12.

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हम उनके IP address को टाइप करके किसी भी website या computer के साथ एक संबंध स्थापित कर सकते हैं।

लेकिन हम मनुष्य केवल संख्या को कुछ हद तक याद रख सकते हैं, लेकिन उसके बाद याद रखना हम में से अधिकांश के लिए मुश्किल हो जाता है। इसलिए हम सभी website के IP address को याद नहीं रख सकते ।

लेकिन हम नाम आसानी से याद कर लेते हैं। इसलिए हमने कंप्यूटर और वेबसाइटों को कुछ तार्किक नाम दिए हैं ताकि computer या website को उनके नामों से खोजा जा सके।

उसी तरह जब आप कोई वेबसाइट खोलना चाहते हैं, तो आप उस वेबसाइट को उसके IP Address से नहीं, उसके नाम से खोजते हैं। लेकिन उन वेबसाइटों का आईपी एड्रेस भी होता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह कोन याद रखता है की कौन से  IP Address का कौन सा नाम है। यहाँ से DNS का काम शुरू होता है।

What is DNS? DNS क्या है?

DNS की full form Domain Name System है। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, यह नाम सेवाएं प्रदान करता है। DNS, या Domain Name System, मनुष्य के पड़ने योग्य domain name जैस www.amazon.com को मशीनों को पढने योग्य IP address जैसे 192.0.2.44 में अनुवाद करता है।

दूसरे शब्दों में अगर हम किसी computer या website का नाम जानते हैं तो DNS हमें उसका IP address जानने में मदद करता है या अगर हम computer या website का IP address जानते हैं तो DNS हमें उसका नाम खोजने में मदद करता है ।

[DNS with Example]. उदाहरण की मदद से DNS को समझें।

आइए इसे मोबाइल फोन बुक जैसे आसान उदाहरण से समझते हैं। अपनी Mobile Phonebook में आप अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के contact number और नाम save करते हैं।

और जब भी आपको उन्हें कॉल करना हो, आप उनका नाम search करते है और उन्हें कर देते है और बैकग्राउंड में आपका मोबाइल फोन उस नाम को उनके मोबाइल नंबर में बदल देता है और उन्हें कॉल करता है।

उसी तरह से DNS, Computer या website के नाम को उनके IP Address में अनुवादित करते हैं और उस Computer या website से आपकी कनेक्टिविटी स्थापित करते हैं।

Why is DNS important? DNS महत्वपूर्ण क्यों है?

DNS का उपयोग इंटरनेट या निजी नेटवर्क में किया जा सकता है। आज के युग में इंटरनेट का उपयोग डीएनएस के बिना नहीं किया जा सकता है क्योंकि डीएनएस के बिना आपको उन सभी वेबसाइटों और कंप्यूटर के आईपी पते को याद रखना होगा जिनसे आप कनेक्ट करना चाहते हैं। और दुनिया में लाखों वेबसाइट हैं और उन सभी के आईपी पते को याद रखना बहुत मुश्किल है।

Some important things [कुछ महत्वपूर्ण बातें]

इससे पहले कि हम DNS के बारे में बाकि चीजे जाने हम पहले यह समझ लेते है की यह काम कैसे करता है। हम पहले से ही जानते हैं कि यह IP address को Domain Name से जोड़ता है, लेकिन क्या आपको यह पता है की यह जानकारी कहाँ store होती है? यह जानकारी Nameservers पर store होती है ।

Nameservers, DNS records को store करती है जो की यह बताती है की कोनसे domain का कोनसा IP address हैं। तो क्या कहीं एक ऐसी जगह है जिसमें इंटरनेट पर हर website के लिए सभी Nameservers और DNS records हैं? नहीं … ऐसा नहीं है।

यह reality में दुनिया भर में बाटे जाते हैं। इन Nameservers को Root Nameservers कहा जाता है और सभी domain को store करने के बजाय, वे Top Level Domain को Store करते हैं।

Top Level Domain  या TLD दो या तीन वर्णों के होते है जैसे की .in या .com जो की domain name के अंत में आते है। हर Top Level Doman का अपना Nameserver का सेट होता है जो की उस जानकारी को store करता है जो उस domain के लिए DNS Record को store करने के लिए आधिकारिक है।

authoritative nameserver आमतौर पर DNS provider या DNS registrar होता है (जैसे GoDaddy जो DNS registration और hosting दोनों प्रदान करता है)। और यहाँ हम DNS Records को ढूँढ सकते हैं, जो किसी website  name को किसी IP address से जोड़ता है ।

How Does DNS actually work [DNS वास्तव में कैसे काम करता है]

प्रक्रिया तब शुरू होती है जब आप अपने कंप्यूटर से होस्टनाम को हल करने के लिए कहते हैं, जैसे जब आप किसी website के domain name को search करते हैं

Step 1:

जब आप किसी domain name को search करते हैं तो आपका पहला कदम वास्तव में root name server पर नहीं होता है। इसके बजाय, आपका ब्राउज़र आपके local name server से पूछेगा कि क्या उसके पास उस डोमेन के लिए DNS Record हैं।

Step 2:

जवाब देने वाला name server आमतौर पर आपका ISP (Internet Service Provider) है, और अगर यह google.com जैसी famous वेबसाइट है, तो शायद उसकी cache memory में इसका रिकॉर्ड होगा। इस स्थिति में, आप बाकी DNS lookup प्रक्रिया को छोड़ देंगे। और यह प्रक्रिया आमतौर पर यहां समाप्त हो जाएगी और user को जानकारी वापस आ जाती है।

हालांकि, ये record केवल थोड़े समय के लिए store किए जाते हैं। जब भी आप एक record बनाते हैं, तो आपके पास TTL (Time to Live) सेट करने का option होता है। TTL, name server को यह बताता है की  वह record information को कितने समय तक store कर सकते हैं। TTL की time limit 30 सेकंड से एक सप्ताह तक हो सकती हैं।

Step 3:

पर यदि वह record cache memory में नहीं है  तब हल करने वाला name server उस domain के TLD के लिए root name server से पूछेगा, root name server इसके उत्तर के लिए इसे TLD  के पास भेज देगा ।   

Step 4:

हर TLD का अपना Nameserver का सेट होता है (जैसे .com, .org, .in) और फिर वह search की गयी website के नाम के मुताबिक Authoritative DNS Server से उतर के लिए पूछता है और Authoritative DNS Server के पास हर domain की information होती है । और इस तरह यह प्रक्रिया ख़तम होती है ।

और यही सब होता है एक domain namn से  IP address का पता लगाने में, और यह सब सिर्फ 2 milliseconds में होता हैं। आप अपनी आंख को 50 milliseconds के अन्दर के बार झपका लेते है और यह सब 30 milliseconds से भी कम समय में हो जाता हैं।  

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